Uncategorizedधर्म
आज से शुरु हो गए हैं मां दुर्गा के नवरात्रे प्रथम नवरात्रे पर आज उपासक करेंगे मां शैलपुत्री की उपासना
विधि-विधान के अनुसार की जानी चाहिए कलश की स्थापना नियमों व मर्यादाओं का श्रद्धालुओं को करना चाहिए पालन : मुकेश शर्मा

गुड़गांव (अशोक): संकल्पी शक्ति के साथ ईश्वरीय शक्ति का मेल हर मनोरथ को पूर्ण कर सकता है। चैत्र नवरात्रों का यही संदेश है। मां दुर्गा के नवरात्रे आज शनिवार से प्रारंभ हो रहे हैं। मां दुर्गा के 9 स्वरुपों का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप को शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। प्रथम नवरात्रे पर आज जहां उपासक मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप मां शैलपुत्री की पूरे विधि विधान के अनुसार उपासना करेंगे, वहीं मां दुर्गा के व्रत भी रखेंगे।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि जो उपासक मां भगवती दुर्गा की शरण में आ जाते हैं, उनका कभी कोई अमंगल नहीं होता। मां दुर्गा की शक्तियां विषम परिस्थितियों में भी अपने उपासकों की रक्षा करती है। शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मी मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप का नाम शैलपुत्री है। मां शैलपुत्री पार्वती और हेमवती नामों से भी जानी जाती हैं। मां का वाहन वृषभ है और इनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है।
मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्ति हेतु षोडशोपचार पूजन के बाद नियमानुसार उपासकों को गाय का घृत मां को अर्पित करना चाहिए और फिर वह घृत ब्राह्मण को दे देना चाहिए। माना जाता है कि जो उपासक मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना करते हैं, वे कभी रोगी नहीं होते। मां की पूजा अर्चना करने से मनवांछित फल मिलता है। मां सभी का उद्धार करती हैं।
आज शनिवार को नवरात्र के प्रथम दिन कलश की स्थापना उपासकों को पूरे विधि-विधान के अनुसार करनी चाहिए। कलश स्थापना के बाद ही मां दुर्गा के स्वरुपों की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए। पंडित मुकेश शर्मा का कहना है कि स्नान ध्यान करके देवी दुर्गा, भगवान गणेश,नवग्रह, कुबेर आदि की मूर्ति के साथ कलश की स्थापना करनी चाहिए। कलश के ऊपर रोली से ओम् और स्वस्तिक लिखा जाना चाहिए।
कलश स्थापना के समय पूजा गृह में पृथ्वी पर 7 प्रकार के अनाज रखे जाने चाहिए। कलश में गंगाजल, लोंग, ईलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी व पुष्प आदि डाले जाने चाहिए। पंडित जी का कहना है कि 7 अनाजों सहित रेत के ऊपर कलश की स्थापना की जानी चाहिए। जौं अथवा कच्चा चावल और कटोरे में भरकर कलश के ऊपर भरकर रखा जाना चाहिए। चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल कलश के ऊपर श्रद्धालुओं को रखना चाहिए। उनका कहना है कि चैत्र नवरात्र में देवी तामस स्वरुप में आती हैं। इस लिए उनकी आराधना में भूल या अनदेखी से बचना चाहिए। वैसे भी नवरात्र साधना का कालखण्ड हैं और साधना के लिए नियमों व मर्यादाओं का पालन करना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है।
पंडित जी का कहना है कि इस बार कलश स्थापना के लिए मात्र ढाई घंटे का समय ही मिल पाएगा। बताया जाता है कि प्रातः सूर्योदय के बाद 5 बजकर 52 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक प्रातः कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। इसके बाद वैधृति योग लग जाएगा। इसमें घट स्थापना शुभ नहीं मानी जाती।नवरात्रों के दौरान स्वच्छता व पवित्रता का ध्यान रखा जाना चाहिए, कलह आदि नहीं करनी चाहिए, मां दुर्गा को तीव्र ध्वनि पसंद नहीं है। इसलिए श्रद्धालुओं को चाहिए कि तेज आवाज में माता के गाने न बजाएं। भक्ति भाव से किया गया भजन साधकों की साधना में सहायक होगा।

