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आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मनाया गया सुपोषण दिवस

नोएडा। जनपद के 1108 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मंगलवार को सुपोषण दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी। आंगनबाड़ी केन्द्र ममूरा पहुंच कर जिला कार्यक्रम अधिकारी पूनम तिवारी ने स्वयं बच्चों और धात्री महिलाओं के पोषण के बारे में बताया।
पूनम तिवारी ने मां के दूध की महत्ता बताते हुए कहा- छह माह तक के बच्चे के लिए मां का दूध पर्याप्त है। मां के दूध में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो बच्चे के लिए आवश्यक हैं। इसके अलावा मां के दूध में पर्याप्त मात्रा में पानी भी होता है, इसलिए छह माह तक बच्चे को पानी भी नहीं देना है। इस दौरान सिर्फ और सिर्फ स्तनपान ही कराना है। उन्होंने कहा शिशु को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान जरूर कराना चाहिए। मां का पीला गाढ़ा दूध बच्चे के लिए टीके के समान होता है, जो बच्चों को तमाम बीमारियों से बचाता है, यानि बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है। उन्होंने कहा नवजात शिशु को शहद, घुट्टी आदि देना नुकसानदायक है। इन सबसे संक्रमण होने का खतरा रहता है।
पूनम तिवारी ने छह माह के बाद बच्चों को ऊपरी आहार जैसे दाल, दलिया, घुटी हुई सब्जियां देने की सलाह दी। इसके अलावा उन्होंने धात्री महिलाओं से कहा कि वह भी अपने पोषण पर ध्यान दें। बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए मां का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। माताएं दाल, डेयरी पदार्थ- (दूध,दही पनीर) सब्जी, फल और तेल का । उन्होंने मोटे अनाज- ज्वार, बाजरा, रागी के सेवन के लिए भी कहा। उन्होंने कहा-शाम को गेहूं की जगह रागी और बाजरा सहित मोटा अनाज का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
एचसीएल-कोहेजन फाउंडेशन की मंजू शर्मा ने बताया- जिस समय बच्चे के दांत निकल रहे होते हैं अक्सर उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत हो जाती है। यह दांत निकलने की वजह से नहीं बल्कि उस दौरान बच्चा जमीन पड़ी चीजें मुंह में डाल लेता है, जिससे वह संक्रमण का शिकार हो जाता है और उसे उल्टी-दस्त हो जाते हैं। इसलिए यह ध्यान देना जरूरी है कि बच्चा जमीन से उठाकर कुछ भी न खाने पायें। इसके अलावा उसे खाना खिलाते वक्त साफ सफाई पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया किस उम्र तक बच्चों को क्या और कैसा खाना देना हैं। उन्होंने यह भी बताया- बच्चा कम वजन का पैदा होता है तो दूध देने की बारम्बारता बढ़ानी है। उसे आठ से नौ बार दूध देना है। इन सभी बातों का ध्यान रख कर सभी लोग अपने बच्चों को स्वस्थ ऱख सकेंगे। उन्होंने तिरंगे फूड के इस्तेमाल पर जोर दिया। खाने में लाल सफेद और हरा रंग का इस्तेमाल होना जरूरी है। लाल रंग में चुकंदर, सेब टमाटर, सफेद यानि दूध, दही पनीर, और हरा मतलब हरी साग सब्जियां।
कार्यक्रम में पुरुषों ने भी भाग लिया। उन्हें उनकी भूमिका के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में आयीं ममूरा की गुडियां ने बताया उनके दो बच्चे हैं। दोनों बच्चों को उन्होंने छह माह तक केवल स्तनपान कराया, यहां तक कि पानी भी नहीं पिलाया। यह जानकारी उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्र से मिली थी, उसी पर अमल किया। उनके दोनों बच्चे एकदम स्वस्थ हैं। इसी तरह ममूरा निवासी बजरंगी ने बताया- उनके एक बच्चा है। उन्होंने इस बात का ध्यान रखना है कि बच्चे को छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना है। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऊषा चौहान, क्षेत्र की गर्भवती और धात्री महिलाएं उपस्थित रहीं।

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