जल जीवन मिशन की गुणवत्ता पर सख्ती: खामियों पर होगी कार्रवाई- स्वतंत्र देव सिंह

जल जीवन मिशन की गुणवत्ता पर सख्ती: खामियों पर होगी कार्रवाई- स्वतंत्र देव सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ‘हर घर नल से जल’ योजना को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए सरकार ने अभियान तेज कर दिया है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने सोमवार को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने और सभी गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जल निगम (ग्रामीण) के सभागार में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव, जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन तथा भूगर्भ जल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में जल जीवन मिशन के तहत चल रही परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

 

अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 36,364 नई पेयजल योजनाओं के माध्यम से 85,163 राजस्व गांवों को जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा 5,978 पुरानी योजनाओं के जरिए 10,951 गांवों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। वर्तमान में 57,242 राजस्व गांवों में नियमित जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, जबकि शेष गांवों में निर्माण कार्य तेजी से जारी है। समीक्षा के दौरान जलशक्ति मंत्री ने स्पष्ट कहा कि योजनाओं की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भारत सरकार, राज्य सरकार, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (टीपीआई) और जल निगम स्तर पर नियमित निरीक्षण जारी रखने के निर्देश दिए।

 

साथ ही जहां भी अनियमितता या खामियां पाई जाएं, वहां कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में पुरानी पेयजल योजनाओं के तहत स्वीकृत मरम्मत और अनुरक्षण कार्यों को एक माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया। इसके अलावा 7,682 टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट (टीटीएसपी), फ्लोराइड रिमूवल यूनिट (एफआरयू) और आर्सेनिक रिमूवल यूनिट (एआरयू) से जुड़े कार्यों को भी अगले एक महीने में पूरा करने के निर्देश दिए गए। जनभागीदारी बढ़ाने और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मंत्री ने विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने 15 जून तक प्रत्येक जिले के कम से कम 10 गांवों में ‘जल चौपाल’ आयोजित करने तथा अगले दो सप्ताह के भीतर नियमित जलापूर्ति वाले गांवों में 10 किलोमीटर लंबी ‘जल पदयात्रा’ निकालने के निर्देश दिए। साथ ही ‘जल सारथी ऐप’ के व्यापक प्रचार-प्रसार और भूगर्भ जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर भी बल दिया।

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